Chronicles of Baba Goti Das - 2

Prateek after downing a few cans of Coke (Diet Coke, mind you) runs to the loo to answer mother nature, and as he gets prepared to begin downloading, there is a power cut.

Prateek : Shit man! facebook chat emoticon grumpy

Baba  (shouts from the living room) : Dude! Don't pee on the floor! Facebook Chat Emoticon Gasp
 
Prateek (shouts back) : That Obama guy didn't send me no nightvision goggles! facebook chat emoticon sun glasses

Baba : Swing a little left & right, a little back & forth and as soon as you hear the sound of your stream falling into the sea, stay like that, no matter however twisted or tilted your body is, just STAY LIKE THAT and you are good to go. facebook chat emoticon wink

Prateek : facebook chat emoticon unsure

हम हिन्दुस्तानी, और हमारी ऊँगली करने की आदत !

यार हम हिन्दुस्तानियों की बहुत सारी मस्त आदतों में एक बहुत ही ख़ास आदत है, बीच में ऊँगली करना, जिससे की आज कल मेरा पाला कुछ ज्यादा ही पड़ रहा है, और अब इससे मैं इस हद तक त्रस्त हो चुका हूँ की यह पोस्ट लिखना अब लाजमी हो चुका है.

आज मैं  अपने लिए कुछ अन्तःवस्त्र लेने गया, वहां मेरे चिरपरिचित सेल्समैन की बजाये एक सेल्सगर्ल को काम करते पाया. कुछ देर तो मैं यह सोंचता रहा की शायद मेरी इज्ज़त बचाने कोई निकल कर आएगा, पर ऐसा नहीं हुआ. वो सेल्सगर्ल मेरे पास आई और बोली, "क्या साइज़ है सर ?", मैं बगलें झाँकने लगा. भाई, मैं बहुत खुले विचारों का हूँ, फिर भी एक अनजान युवती को अपना साइज़ बताने में लज्जा तो आएगी ही. अभी मैं सोंच ही रहा था की चड्डी लूं या धीरे से कट लूं  की एक जनाब जो बगल में पजामे देख रहे थे, ने अपने हिन्दुस्तानी होने का सर्वोच्च परिचय देते हुए ऊँगली कर दी. "अरे साइज़ पूछ रही है जांघिये का, बताओ, जांघिया ही लेना है न ?" मैंने मन में कहा, "भूतनी के, जांघिया लूं या चड्डी, तुझे क्यों खुजली हो रही है!" और मैंने आँखें तरेर कर उन जनाब को देखा. मेरा मूड भांपकर वो फिर अपने पजामों में तल्लीन हो गए. पर वार तो उन्होंने कर ही दिया था और अब वह सेल्सगर्ल मेरी तरफ प्रश्नसूचक निगाहों से एकटक देखे जा रही थी, मैंने कहा, "नहीं, टी शर्ट लेनी है." गए थे 200 की चड्डी के लिए, 900 की टी शर्ट ले कर लौटे!

कुछ दिनों पहले मैं बंगलोर जा रहा था, साथ में सामान कुछ ज्यादा था. मैं चेक-इन काउंटर पर सामान देने चला. चेक-इन के समय मेरा सामान allowed weight से 5 किलोग्राम ज्यादा था, पर डेस्क स्टाफ ने कुछ नहीं कहा और मेरा बोअर्डिंग पास देने लगी की तभी ऍन मौके पर मेरे पीछे से एक मैडम ने कहा, "योर बैगेज इस 5 kgs ओवर द लिमिट" मैंने कहा, " आइ नो, बट थैंक यू फॉर सेइंग इट अलाउड!" फिर डेस्क स्टाफ ने भी मेरे पिछवाड़े वाली मैडम की बात दुहरा दी और ३०० रूपये मांग लिए!

अभी परसों मैं दिल्ली में था, और जब भी मैं दिल्ली में होता हूँ तो मेट्रो से पाला पड़ता ही है. पर इस बार मैंने एक अलग चीज़ देखी, अब लोगों ने मेट्रो के भी ऊँगली करना शुरू कर दिया है! हर स्टेशन पर कुछ उतरने वाले पहले से ही गेट के पास खड़े रहते हैं, और उन में से एक की ऊँगली  गेट के पास वाली ceiling में मौजूद एक छेद में होती है! हर गेट के पास यही नज़ारा होता है, लोग और ऊँगली और छेद! 

हाय हिन्दुस्तानियों, हाय ऊँगली, हाय छेद.
 

Chronicles of Baba Goti Das - 1

Baba : These bloody presswallahs yaar! Koi dhang ki khabar nahin dete hain. Ab tu hi bata, Sania ki shaadi ka menu jaankar hum kya karenge!

Prateek : Hmmmm ....... sahi bol raha Baba!

Rahul : Abe dekh aaj paper mein Sania ki shaadi ki photo nikli hai !!!

Prateek and Baba (rush towards Rahul @120mph, salivating) : Abe kahan! Dikha be dikha!

The Big Piracy Debate

Hey Peeps!

I was fooling around  Mohan's Blog a coupla days ago, and I came across a very interesting post, Law Enforcement… Err Piracy Enforcement, a post revolving around corruption and piracy, with an even more interesting comment string. With all due credits to Mohan, I am reproducing a few comments below. It is more like a dialogue between Mohan and me :)


Prateek April 20, 2010 at 9:24 am
Hmmm…. the corruption thing is right but I would beg to disagree with the piracy thingy. Piracy? why not? What has shahrukh done so monumental that he deserves to be so overpaid, why shouldn’t he work for a monthly salary instead? The picture quality of these dvds is so bad that no movie lover would buy them. They are mostly bought by poor people who can’t afford to go to movies or by kids who have to make do with a meager allowance. I don’t think you would want a rickshaw puller to skip his dinner for a week to be able to go to a movie !
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